भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने भारत में गंभीर संक्रामक रोगों का कारण बनने वाले कई प्राथमिक रोगजनकों का एक साथ पता लगाने में सक्षम उन्नत रियल-टाइम मल्टीप्लेक्स मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक असेज़ के विकास के लिए योग्य संगठनों, कंपनियों और निर्माताओं से Expression of Interest (EoI) आमंत्रित किया है।
यह पहल ICMR के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी, उच्च-गुणवत्ता वाले डायग्नोस्टिक टूल्स के विकास को बढ़ावा देना है, ताकि रोग निगरानी (disease surveillance) और क्लिनिकल निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सके—विशेष रूप से उन स्थितियों में जहाँ एक साथ कई रोगजनकों की तेज़ पहचान आवश्यक होती है।
EoI का दायरा (Scope of EoI)
मल्टीप्लेक्स मॉलिक्यूलर असेज़ का विकास
ICMR द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार:
- ऐसे रियल-टाइम मल्टीप्लेक्स मॉलिक्यूलर असेज़ विकसित करना जो एक ही टेस्ट में कई रोगजनकों की जांच कर सकें।
- यह पारंपरिक “एक रोगजनक–एक टेस्ट” पद्धति की तुलना में समय और लागत दोनों को कम करेगा।
लक्षित संक्रामक रोग (Targeted Infectious Syndromes)
संभावित रोग श्रेणियाँ:
- श्वसन संबंधी रोग (Respiratory diseases)
- बुखार से संबंधित बीमारियाँ (Febrile illnesses)
- जठरांत्र संक्रमण (Gastrointestinal infections)
- अन्य सिंड्रोमिक संक्रमण
इन सभी का भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर बड़ा प्रभाव पड़ता है।
पात्रता (Eligibility)
- स्वदेशी निर्माता (Indigenous manufacturers)
- अनुसंधान एवं विकास (R&D) संगठन
- शैक्षणिक संस्थान (जो उद्योग साझेदारों के साथ कार्य कर रहे हों)
ICMR चयनित आवेदकों के साथ विशिष्ट (exclusive) या गैर-विशिष्ट (non-exclusive) समझौते कर सकता है।
ICMR द्वारा सहायता और आगे की प्रक्रिया
ICMR उत्पाद विकास को तेज़ करने के लिए कई प्रकार की तकनीकी और नियामक सहायता प्रदान करेगा:
तकनीकी और नियामक सहायता
प्रमुख समर्थन:
- GMP (Good Manufacturing Practice) प्रमाणन प्राप्त करने में सहायता
- विकसित असेज़ के लिए CDSCO (Central Drugs Standard Control Organization) से मूल्यांकन और अनुमोदन में सहयोग
- उत्पाद की गुणवत्ता और प्रदर्शन परीक्षण की सुविधा
वित्तीय सहायता
- विकास के विभिन्न चरणों के लिए माइलस्टोन आधारित वित्तीय सहायता
- लाइसेंसिंग और नियामक स्वीकृति तक लागत को कम करने में मदद
यह समर्थन भारत में स्वदेशी डायग्नोस्टिक तकनीकों को मजबूत करने के उद्देश्य से दिया जा रहा है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है (Why It Matters)
मल्टीप्लेक्स असेज़ के लाभ
मल्टीप्लेक्स मॉलिक्यूलर असेज़ एक ही परीक्षण में कई रोगजनकों की पहचान करने में सक्षम होते हैं। इससे:
- तेज़ और सटीक निदान संभव होता है
- डॉक्टरों को तुरंत सही उपचार निर्णय लेने में मदद मिलती है
- कई अलग-अलग टेस्ट की आवश्यकता कम हो जाती है
प्रमुख उपयोग
1. सिंड्रोमिक संक्रमण (Syndromic Infections)
- जब लक्षण एक जैसे हों, तब सही रोग पहचानने में मदद
- क्वारंटीन और उपचार निर्णय में तेजी
2. एंटीबायोटिक उपयोग नियंत्रण (Antibiotic Stewardship)
- वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण में अंतर करने में मदद
- अनावश्यक एंटीबायोटिक उपयोग को कम करता है
3. सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी (Public Health Surveillance)
- तेजी से फैलने वाले रोगों की निगरानी
- बड़े स्तर पर परीक्षण (scalable testing) संभव
यह पहल भारत को भविष्य की महामारी और संक्रामक रोगों के लिए बेहतर तैयार करती है।
आवेदन विवरण और अंतिम तिथि
महत्वपूर्ण जानकारी
EoI विवरण:
- दस्तावेज़ संख्या: ICMR/EoI/Multiplex/2026
- प्रकाशन तिथि: 9 जनवरी 2026
आवेदन प्रक्रिया:
- प्रस्ताव एक सीलबंद लिफाफे में भेजना होगा
- पता: ICMR मुख्यालय, नई दिल्ली (Communicable Disease Division)
अंतिम तिथि:
- 25 जनवरी 2026
ICMR को EoI में संशोधन, रद्द करने या पुनः जारी करने का अधिकार सुरक्षित है। अधिक जानकारी ICMR की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
आगे क्या होगा (What Comes Next)
चयनित आवेदकों को ICMR के साथ औपचारिक समझौते के लिए आमंत्रित किया जा सकता है, जिसमें शामिल होंगे:
विकास और मूल्यांकन प्रक्रिया
प्रमुख चरण:
- संरचित विकास समयरेखा (Development timeline)
- उत्पाद परीक्षण (Product testing)
- नियामक प्रक्रिया (Regulatory approvals)
यह सहयोगी R&D प्रक्रिया इन डायग्नोस्टिक असेज़ को अवधारणा से क्लिनिकल उपयोग तक ले जाने में मदद करेगी।
निष्कर्ष
ICMR की यह पहल भारत में सिंड्रोमिक डायग्नोस्टिक्स को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
तेज़ और मल्टीप्लेक्स परीक्षण न केवल रोगियों के इलाज को बेहतर बनाएंगे, बल्कि देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को भी अधिक मजबूत और सक्षम बनाएंगे।
यह प्रयास भारत को स्वदेशी नवाचार, कम आयात निर्भरता और बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ाता है।

