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किराए पर देना “बिज़नेस” नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने होमबायर्स के अधिकार बहाल किए

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भारत में लंबे समय से घर खरीदने वालों को एक बड़ी कानूनी समस्या का सामना करना पड़ता था। अगर किसी ने अपना फ्लैट किराए पर दे दिया—चाहे EMI भरने के लिए या नौकरी के कारण—तो बिल्डर्स यह दावा करते थे कि वह अब “consumer” नहीं रहा।

लेकिन अब Supreme Court of India ने इस प्रैक्टिस को पूरी तरह खत्म कर दिया है।


1. केस क्या था?

यह मामला Vineet Bahri v. MGF Developers से जुड़ा है।

  • 2005 में एक फ्लैट बुक किया गया
  • 10 साल की देरी के बाद 2015 में पजेशन मिला
  • लेआउट में बदलाव और अतिरिक्त चार्ज भी लगाए गए

जब खरीदार ने शिकायत की, तो बिल्डर ने कहा:
👉 “फ्लैट किराए पर दिया गया है, इसलिए यह commercial purpose है”

पहले National Consumer Disputes Redressal Commission (NCDRC) ने बिल्डर की बात मान ली थी।

अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को गलत बताया और खरीदार के अधिकार वापस दिए।


2. “Dominant Purpose” टेस्ट क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने एक नया स्पष्ट नियम दिया:

  • सिर्फ किराए पर देना = बिज़नेस नहीं
  • असली सवाल: आपने घर क्यों खरीदा?

👉 अगर उद्देश्य रहने, परिवार, या सुरक्षा के लिए है, तो आप consumer ही रहेंगे

👉 तभी commercial माना जाएगा जब:

  • लगातार profit कमाने का इरादा हो
  • property खरीदना एक systematic business हो

3. सबसे बड़ा बदलाव: Proof किसे देना होगा?

पहले:

  • खरीदार को साबित करना पड़ता था कि वह investor नहीं है

अब:

  • बिल्डर को साबित करना होगा कि खरीदार commercial है

👉 यानी अब burden पूरी तरह builder पर है


4. आज के होमबायर्स के लिए क्यों जरूरी है?

EMI Reality

  • महंगे शहरों में लोग EMI भरने के लिए किराया लेते हैं
  • कोर्ट ने माना कि यह मजबूरी है, बिज़नेस नहीं

Multiple Properties

  • एक से ज्यादा घर होना = commercial नहीं
  • जैसे:
    • एक अपने लिए
    • एक बच्चों के लिए

Delay Problem

  • कई प्रोजेक्ट 5–10 साल लेट होते हैं
  • इस दौरान लोग मजबूरी में घर किराए पर देते हैं

👉 कोर्ट ने कहा:
खरीदार को बिल्डर की गलती की सजा नहीं मिलनी चाहिए


5. अब कहाँ केस करें?

प्लेटफॉर्मकामअसर
Consumer Courtcompensation, mental stressअब किराए पर देने पर भी केस कर सकते हैं
RERAप्रोजेक्ट नियम और पजेशनमुख्य रेगुलेशन
Civil Courtजटिल विवादलंबा और मुश्किल

6. बिल्डर्स पर असर

  • अब “technical excuses” नहीं चलेंगे
  • किराए का बहाना देकर केस dismiss नहीं कर सकते
  • settlement करने का दबाव बढ़ेगा

7. आपके लिए जरूरी बातें

  • फ्लैट किराए पर देना सुरक्षित है
  • इससे आपका legal case कमजोर नहीं होगा
  • घर खरीदते समय अपने उद्देश्य का रिकॉर्ड रखें

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है:

👉 घर खरीदना एक जरूरत और सुरक्षा है, सिर्फ बिज़नेस नहीं

अब चाहे आप:

  • खुद उसमें रहें
  • खाली रखें
  • या किराए पर दें

आप फिर भी consumer हैं और आपको पूरा कानूनी संरक्षण मिलेगा।

यह फैसला भारतीय होमबायर्स के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच है, जो बिल्डर्स के खिलाफ उनके अधिकारों को और मजबूत करता है।

admin

gauravshukla165@gmail.com https://madgossip.com

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